थे चाहते पैवन्द करें -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

थे चाहते पैवन्द करें -गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

थे चाहते पैवन्द करें ख़ाक का सब को ।
हातिफ़ ने कहा काम में लाना न ग़ज़ब को ।
लड़ना नहीं मनज़ूर है आज आप का रब्ब को ।
येह सुन के गुरू भूल गए रंज-ओ-तअब को ।
कबज़े से मअन तेग़ के फिर हाथ उठाया ।
सतिगुर ने वहीं सजदा-ए-शुक्राना बजायआ ।

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