थे आगे बहुत जैसे कि ख़ुश यार हमीं से-ग़ज़लें-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

थे आगे बहुत जैसे कि ख़ुश यार हमीं से-ग़ज़लें-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

थे आगे बहुत जैसे कि ख़ुश यार हमीं से
ऐसे ही तुम अब रहते हो बेज़ार हमीं से

महफ़िल में जो देखा तो इधर तुम हो खफ़ा, और
साक़ी को भी है हुज्जतो-तकरार हमीं से

औरों से जो कहते हो कि हम उनसे हैं नाख़ुश
इसको तो फ़कत करना है इज़हार हमीं से

समझेगा जो रुतबे को ”नज़ीर” अहले-वफ़ा के
तो मिलने लगेगा वो तरहदार हमीं से

 

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