था सर पि वकत आ गया -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

था सर पि वकत आ गया -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

था सर पि वकत आ गया आसा की वार का ।
साज़ों की ज़ेर-ओ-बुम का, चढ़ायो उतार का ।
मनशा था कलग़ीधर के दिल-ए-बेकरार का ।
मौका मिले तो कर लें भजन किरदगार का ।
जब महव-ए-बन्दगी हुए नानक के जानशीन ।
आ टूटे ख़ालसा पि अचानक कई लईन ।

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