त्रेते छत्त्री रूप धर सूरज बंसी बड अवतारा ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji 

त्रेते छत्त्री रूप धर सूरज बंसी बड अवतारा ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

त्रेते छत्त्री रूप धर सूरज बंसी बड अवतारा ॥
नउं हिसे गई आरजा माया मोह अहंकार पसारा ॥
दुआपुर जादव वेस कर जुग जुग अउध घटै आचारा ॥
रिगबेद महं ब्रहमक्रित पूरब मुख शुभ करम बिचारा ॥
खत्री थापे जुजर वेद दखन मुख बहु दान दातारा ॥
वैसों थाप्या स्याम वेद पछम मुख कर सीस निवारा ॥
रिग नीलम्बर जुजर पीत सवेतम्बर कर स्याम सुधारा ॥
त्रेहु जुगीं त्रै धरम उचारा ॥6॥

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