त्रिवेणी-2-पुखराज-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

त्रिवेणी-2-पुखराज-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

सब पे आती है सब की बारी से
मौत मुंसिफ़ है कम-ओ-बेश नहीं

ज़िन्दगी सब पे क्यूँ नहीं आती

कौन खायेगा किसका हिस्सा है
दाने-दाने पे नाम लिखा है

‘सेठ सूदचंद मूलचंद आक़ा’

उफ़! ये भीगा हुआ अख़बार
पेपर वाले को कल से चेंज करो

‘पांच सौ गाँव बह गए इस साल’

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