त्रिभंगिमा -हरिवंशराय बच्चन -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Harivansh Rai Bachchan Part 1

त्रिभंगिमा -हरिवंशराय बच्चन -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Harivansh Rai Bachchan Part 1

पगला मल्लाह

(उत्तरप्रदेश की एक लोकधुन पर आधारित)

डोंगा डोले,
नित गंग जमुन के तीर,
डोंगा डोले

आया डोला,
उड़न खटोला,
एक परी पर्दे से निकली पहने पंचरंग वीर
डोंगा डोले,
नित गंग जमुन के तीर,
डोंगा डोले

आँखे टक-टक,
छाती धक-धक,
कभी अचानक ही मिल जाता दिल का दामनगीर
डोंगा डोले,
नित गंग जमुन के तीर,
डोंगा डोले

नाव विराजी,
केवट राजी,
डांड छुई भर,बस आ पहुँची संगम पर की भीड़
डोंगा डोले,
नित गंग जमुन के तीर,
डोंगा डोले

मन मुस्काई,
उतर नहाई,
आगे पाँव न देना,रानी,पानी अगम-गंभीर
डोंगा डोले,
नित गंग जमुन के तीर,
डोंगा डोले

बात न मानी,
होनी जानी ,
बहुत थहाई,हाथ न आई जादू की तस्वीर
डोंगा डोले,
नित गंग जमुन के तीर,
डोंगा डोले

इस तट,उस तट,
पनघट, मरघट,
बानी अटपट;
हाय,किसी ने कभी न जानी मांझी-मन की पीर
डोंगा डोले,
नित गंग जमुन के तीर,
डोंगा डोले.डोंगा डोले.डोंगा डोले…

गंगा की लहर

गंगा की लहर अमर है,
गंगा की

धन्य भगीरथ
के तप का पथ
गगन कँपा थरथर है
गंगा की,
गंगा की लहर अम्र है

नभ से उतरी
पावन पुतरी,
दृढ शिव-जूट जकड़ है
गंगा की,
गंगा की लहर अमर है
बाँध न शंकर
अपने सिर पर,
यह धरती का वर है
गंगा की,
गंगा की लहर अमर है

जह्नु न हठकर
अपने मुख धर,
तृपित जगत्-अंतर है
गंगा की,
गंगा की लहर अमर है.

एक धार जल
देगा क्या फल?
भूतल सब ऊसर है
गंगा की,
गंगा की लहर अमर है

लक्ष धार हो
भूपर विचरो,
जग में बहुत जहर है
गंगा की,
गंगा की लहर अमर है

सोन मछरी

स्त्री

जाओ,लाओ,पिया,नदिया से सोन मछरी
पिया, सोन मछरी; पिया,सोन मछरी
जाओ,लाओ,पिया,नदिया से सोन मछरी
जिसकी हैं नीलम की आँखे,
हीरे-पन्ने की हैं पाँखे,
वह मुख से उगलती है मोती की लरी
पिया मोती की लरी;पिया मोती की लरी
जाओ,लाओ,पिया,नदिया से सोन मछरी

पुरुष

सीता ने सुबरन मृग माँगा,
उनका सुख लेकर वह भागा,
बस रह गई नयनों में आँसू की लरी
रानी आँसू की लरी; रानी आँसू की लरी
रानी मत माँगो;नदिया की सोन मछरी

स्त्री

जाओ,लाओ,पिया,नदिया से सोन मछरी
पिया, सोन मछरी; पिया,सोन मछरी
जाओ,लाओ,पिया,नदिया से सोन मछरी
पिया डोंगी ले सिधारे,
मैं खड़ी रही किनारे,
पिया लेके लौटे बगल में सोने की परी
पिया सोने की परी नहीं सोन मछरी
पिया सोन मछरी नहीं सोने की परी

पुरुष

मैंने बंसी जल में डाली,
देखी होती बात निराली,
छूकर सोन मछरी हुई सोने की परी
रानी,सोने की परी; रानी,सोने की परी
छूकर सोन मछरी हुई सोने की परी

स्त्री

पिया परी अपनाये,
हुए अपने पराये,
हाय!मछरी जो माँगी कैसी बुरी थी घरी!
कैसी बुरी थी घरी, कैसी बुरी थी घरी
सोन मछरी जो माँगी कैसी बुरी थी घरी

जो है कंचन का भरमाया,
उसने किसका प्यार निभाया,
मैंने अपना बदला पाया,
माँगी मोती की लरी,पाई आँसू की लरी
पिया आँसू की लरी,पिया आँसू की लरी
माँगी मोती की लरी,पाई आँसू की लरी

जाओ,लाओ,पिया,नदिया से सोन मछरी
पिया, सोन मछरी; पिया,सोन मछरी
जाओ,लाओ,पिया,नदिया से सोन मछरी

(उत्तरप्रदेश के लोक धुन पर आधारित)

लाठी और बाँसुरी

पुरुष

लाडो,बाँस की बनाऊं लठिया की बंसिया?
बंसिया की लठिया?लठिया की बंसिया?
लाडो,बाँस की बनाऊं लठिया की बंसिया?

बंसी-धुन कानों में पड़ती,
गोरी के दिल को पकड़ती,
भोरी मछरी को जैसे,मछुआ की कटिया;
मछुआ की कटिया,मछुआ की कटिया;
लाडो,बाँस की बनाऊं लठिया की बंसिया?

जग में दुश्मन भी बन जाते,
मौका पा नीचा दिखलाते,
लाठी रहती जिसके काँधे,उसकी ऊँची पगिया;
उसकी ऊँची पगिया,उसकी ऊँची पगिया;
लाडो,बाँस की बनाऊं लठिया की बंसिया?

स्त्री

राजा,बाँस की बना ले लठिया औ’ बंसिया
लठिया औ’बंसिया,बंसिया औ’लठिया;
राजा,बाँस की बना ले लठिया औ’ बंसिया

बंसी तेरी पीर बताए,
सुनकर मेरा मन अकुलाए,
सोने दे न जगने दे मेरी फूल-खटिया,
मेरी फूल-सेजिया,मेरी सूनी सेजिया;
राजा,बाँस की बना ले लठिया औ’ बंसिया

प्रेमी के दुश्मन बहुतेरे,
ऐरे-गैरे-नत्थू-खैरे,
हारे,भागे न किसी से मेरा रंग-रसिया;
मेरा रंग-रसिया,मेरा रन-रसिया;
राजा,बाँस की बना ले लठिया औ’ बंसिया.

खोई गुजरिया

मेले में खोई गुजरिया,
जिसे मिले मुझसे मिलाए

उसका मुखड़ा
चाँद का टुकड़ा,
कोई नज़र न लगाये,
जिसे मिले मुझसे मिलाए
मेले में खोई गुजरिया,
जिसे मिले मुझसे मिलाए

खोये-से नैना,
तोतरे बैना,
कोई न उसको चिढ़ाए
जिसे मिले मुझसे मिलाए
मेले में खोई गुजरिया,
जिसे मिले मुझसे मिलाए

मटमैली सारी,
बिना किनारी,
कोई न उसको लजाए,
जिसे मिले मुझसे मिलाए
मेले में खोई गुजरिया,
जिसे मिले मुझसे मिलाए

तन की गोली,
मन की भोली,
कोई न उसे बहकाए,
जिसे मिले मुझसे मिलाये
मेले में खोई गुजरिया,
जिसे मिले मुझसे मिलाये

दूंगी चवन्नी,
जो मेरी मुन्नी,
को लाए कनिया उठाए
जिसे मिले मुझसे मिलाये
मेले में खोई गुजरिया,
जिसे मिले मुझसे मिलाये

(उत्तरप्रदेश के लोकधुन पर आधारित)

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