तौहीद के परचार से सब-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

तौहीद के परचार से सब-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

तौहीद के परचार से सब नेकियां कम हैं ।
मुहताज इसी चीज़ के अब दीन-ओ-धर्म हैं ।
साग़र मए-तौहीद का गो पी चुके हम हैं ।
लेकिन दिल-ए-मुस्लिम में भी मौजूद सनम हैं ।
है शिरके-ख़फ़ी शिरके-जली आम नहीं है ।
ताहम जो है इस्लाम वुह इस्लाम नहीं है ।

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