तो बात बने…-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

तो बात बने…-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

गर सलीब अपनी उठाओ तो बात बने
मसीहा बन के दिखाओ.. तो बात बने !

हंसते हुए भीग गयी होंगीं पलकें बेशक
रोते हुए जो मुस्कुराओ.. तो बात बने !

छोड़ देना कुछ कहीं, क्या मुश्किल है
मक़ाम तलक पहुँचाओ.. तो बात बने !

ख़ुशगवार राहों का सफ़र आसाँ होगा
पत्थरों पर चल पाओ.. तो बात बने !

दुनिया को परखने से है क्या हासिल
ख़ुद को भी आज़माओ.. तो बात बने !

फ़क़त रंजिशें निभाने में रखा क्या है
यदि रिश्ते निभा पाओ.. तो बात बने !

ज़िन्दगी छोटी सही, नायाब तोहफा है
बस सलीक़े से जी पाओ तो बात बने !

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