तोते उड़ गए-कविता-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

तोते उड़ गए-कविता-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

दिल मियाँ मिट्ठू थे
मर्ज़ी के पिट्ठू थे
हो दिल मियाँ मिट्ठू थे
अरे मर्ज़ी के पिट्ठू थे
वो मेरी कहाँ सुनते थे
अरे अपनी ही धुन पे थे
दिल मियाँ मिट्ठू थे

मियाँ जी बच बच के चलना
दुनिया है हरजाई
हरी हरी जो लागे
घास खड़ी है काई
अरे काई पे फिसले जो सुर्र करके
फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र फुर्र करके तोते उड़ गए

इश्क में यूँ फिसले मियाँ
हाथों के तोते उड़ गए
तोते उड़ गए
फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र फुर्र करके तोते उड़ गए

दिल मियाँ मिट्ठू थे
मर्ज़ी के पिट्ठू थे
अकड़े तो तगड़े से
और पकडे तो मकड़े से
दिल मियाँ मिट्ठू थे मिट्ठू मियाँ
मियाँ जी मुड़ मुड़ के न देखो
मुड़ मुड़ न देखो मियाँ जी
अजी नज़रों में कोई नहीं है
नज़र लगाईं थी अंखियाँ हाँ
सालों से सोई नहीं हैं
सपने से धंसने पे सुर्र

तोते! फुर्र करके तोते उड़ गए
ओ पतली गली में फिसले मियाँ
हाथो के तोते उड़ गए

मेरे नग मुंदरी विच पा दे
ते पावे मेरी जिंद कड लै
के पावे मेरी जिंद कड लै
अक्खी रात मैं गई तबेले
माझी मिल जावे.
मुक जान झमेले
माझी मिल जावे…
मुक जान झमेले
मेरी सेज ते अकल बिछा दे
ते पावे मेरी जिंद कड लै
के पावे मेरी जिंद कड लै

फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र फुर्र करके तोते उड़ गए

फिल्म – एक थी डायन(2013)

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