तैरने दो मुझे-ज़हीर अली सिद्दीक़ी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Zahir Ali Siddiqui

तैरने दो मुझे-ज़हीर अली सिद्दीक़ी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Zahir Ali Siddiqui

 

तैरने दो मुझे
डूबने के भय से
निजात पाऊँगा
हाथ-पैर चलाकर
तैरना सीख जाऊँगा।।

लड़ने दो मुझे
हार के की दहशत से
जीत जाऊँगा
गिरकर उठने से
लड़ना सीख जाऊँगा।।

खेलने दो मुझे
डर के काल को
बेहाल कर दूंगा
हार से लड़कर
खेलना सीख लूँगा ।।

बहने दो मुझे
दशाओं से लड़कर
दिशा बदल दूंगा
बाधा को तोड़कर
बहना सीख लूँगा ।।

लिखने दो मुझे
कलम की धार से
बुराई समेट दूँगा
फिज़ा को सींचकर
लिखना सीख लूँगा ।।

खोजने दो मुझे
अंधकार से दूर
कुकृत्यों को मार दूँगा
ग़ायब क़िरदार को
खोजना सीख लूँगा ।।

देखने दो मुझे
आँख से पट्टी हटा
बदला रूप बदल दूँगा
आत्म मंथन कर
देखना सीख लूँगा ।।

प्यार करने दो मुझे
कांटे से गुज़र कर
कली को सींच लूँगा
लहू के कतरे से
प्यार की शाख दूँगा ।।

 

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