तेवर चालीसा -रमेशराज -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshraj Tewar-Chalisa Part 2

तेवर चालीसा -रमेशराज -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshraj Tewar-Chalisa Part 2

निवेश है विदेशी
सोच मत सोच, देश साँकलों के साथ है। 20

कैंचियों के देश में
एक भी कपोत कहाँ पै परों के साथ है? 21

आदमी को देख के
पेड़ बोले-“देख ले कुल्हाडि़यों के साथ हैं”। 22

द्रौपदी बिकी देख
दुःशासन सभा बीच ठहाकों के साथ है। 23

चाकू-छुरी हाथ में
आज का इन्सान यूँ मजहबों के साथ है। 24

कोठरी में साधु की
‘रेप’ बाजे ढोल ताशे चीमटेों के साथ है। 25

संत है विरागी यूँ
ब्रह्मचर्य चार-चार बीवियों के साथ है। 26

झपटेगा जरूर
आज यदि चुप बाघ मैमनों के साथ है। 27

पौध मत रोप तू
भूमि उपजाऊ कहाँ कंकड़ों के साथ है। 28

घौंसला तभी बने
जुड़ा हुआ हर तृण जो तृणों के साथ है। 29

हम में दाग नहीं
बोल रहा वह आज जो छलों के साथ हैं 30

‘बम’-सा मत रख
जहाँ हर किस्सा किलकारियों के साथ है। 31

सुख संघर्ष-बीच
हर्ष जैसी भावना भी तो दुःखों के साथ है। 32

चाल दुष्ट द्रोण की
एकलव्य आज कटे बाजुओं के साथ है। 33

हम रहे होश में
बहकी हुई जिन्दगी मैकशों के साथ है। 34

त्याग से रहे दूर
धन शान आन बान तो मठों के साथ है। 35

रावणों के राज में
पाँव-बलविहीनता अंगदों के साथ है। 36

कैसा समूह-गान?
आदमी भी रैंक रहा गर्दभों के साथ है। 37

कैसी कदमताल?
एक भी न पग मग में मगों के साथ है। 38

मुर्दों में डालें जान
हौसला हमारा आज बेबसों के साथ है। 39

आप पायलों बीच
तेवरी की भावना व्याकुलों के साथ है। 40

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