तेरे सजदे में सिर झुका नमन है-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

तेरे सजदे में सिर झुका नमन है-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

तेरे सजदे में सिर झुका नमन है
तुझे दिल से हजारों सलाम कर दूँ।
लिपटा तू तिंरगे से भारत का शौर्य
तेरे अद्भुत साहस का जयगान कर दूँ।।

लाल कहता है माँ अपनी,
जिंदगी तेरे नाम कर दूँ।
पिता कहता है एक बेटा,
क्या दूसरा कुर्बान कर दूँ।।
भारत की नारी ये कहती
बेवा हुई तो गम नहीं।
सौ पुत्र मेरे हों तो,
सवा अरब के नाम कर दूँ।।

बिचलित वेदना सी मैं
ये दर्द कहा बयान कर दूँ।
पूछती है ऐ सियासत
क्या तुझपर इल्जाम कर दूँ।।
बहनों ने जिस कलाई पर
बाँधी राखी,
वो शरीर टुकड़ों में है,
मैं कैसे पहचान कर दूँ।।

तेरे सजदे में सिर झुका नमन है
तुझे दिल से हजारों सलाम कर दूँ।
लिपटा तू तिंरगे से भारत का शौर्य
तेरे अद्भुत साहस का जयगान कर दूँ।।

 

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