तेरे जिस दिन से ख़ाक-पा हैं हम-बहादुर शाह ज़फ़र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bahadur Shah Zafar

तेरे जिस दिन से ख़ाक-पा हैं हम-बहादुर शाह ज़फ़र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bahadur Shah Zafar

तेरे जिस दिन से ख़ाक-पा हैं हम
ख़ाक हैं एक कीमिया हैं हम

हम-दमो मिसले-सूरते-तस्‍वीर
क्‍या कहें तुमसे, बेसदा हैं हम

हम हैं जूँ ज़ुल्‍फ़े-आरिज़े-ख़ूबाँ
गो परेशाँ है खुशनुमा हैं हम

जिस तरफ़ चाहे हम को ले जाए
जानते दिल को रहनुमा हैं हम

जो कि मुँह पर है, वो ही दिल में है
मिसले-आईना बा-सफ़ा हैं हम

तू जो नाआशना हुया हमसे
ये गुनाह है कि आशना हैं हम

ऐ ‘ज़फ़र’ पूछता है हमको सनम
क्‍या कहें बन्‍दा-ए-खुदा हैं हम

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