तेरी भारी हार-बादर बरस गयो-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

तेरी भारी हार-बादर बरस गयो-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

हुई थी तेरी भारी हार !

मन बोला अब भक्ति न होगी,
पूजा में अनुरक्ति न होगी,
देने को वरदान देवता हुआ कि जब तैयार !
हुई थी तेरी भारी हार !

पग बोला क्षण-भर भी मैं अब,
चल न सकूँगा इस पथ पर जब,
मंज़िल थी रह गई दूर बस केवल पग दो-चार !
हुई थी तेरी भारी हार !

कंठ रुका सहसा यह कहकर,
रह अनसुना ही मेरा स्वर,
मुखरित होने वाला था जब गीतों का संसार !
हुई थी तेरी भारी हार !

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