तेरी दुनिया से होके मजबूर चला-गीत -प्रेम धवन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Prem Dhawan 

तेरी दुनिया से होके मजबूर चला-गीत -प्रेम धवन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Prem Dhawan

तेरी दुनिया से होके मजबूर चला
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला
तेरी दुनिया से होके मजबूर चला
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला
तेरी दुनिया से

इस क़दर दूर के फिर, लौट के भी आ न सकूँ
ऐसी मंज़िल के जहाँ, खुद को भी मैं पा न सकूँ
और मजबूरी है क्या?
और मजबूरी है क्या, इतना भी बतला न सकूँ
तेरी दुनिया से होके मजबूर चला
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला
तेरी दुनिया से

आँख भर आयी अगर, अश्क़ों को मैं पी लूँगा
आह निकली जो कभी, होंठों को मैं सी लूँगा
तुझसे वादा है किया
तुझसे वादा है किया, इस लिये मैं जी लूँगा
तेरी दुनिया से होके मजबूर चला
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला
तेरी दुनिया से

खुश रहे तू है जहाँ, ले जा दुआएँ मेरी
तेरी राहों से जुदा हो गयी राहें मेरी
कुछ नहीं साथ मेरे
कुछ नहीं साथ मेरे, बस हैं खताएँ मेरी
तेरी दुनिया से होके मजबूर चला
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला
तेरी दुनिया से

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