तेरी आंखों में जब जब देखा-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

तेरी आंखों में जब जब देखा-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

तेरी आंखों में जब जब देखा,
जो कशिश दिखी दिल पार गयी ।

आंखों से पढ़ा वो नजराने को,
प्यार का दम भरते हुए ।

वे एक नाव पर नहीं टिकते,
उनकी आंखों को कहते हुए।।

बस ये जानकर जब देखा,
तरंग तरंग को काट गयी।

तेरी आंखों में जब जब देखा,
जो कशिश दिखी दिल पार गई।

तुम्हें छोड़ने की आदत सी,
हर जाम मे रंग भरते हुए ।

तुम्हें परवाह नहीं किसी की,
तेरे चेहरे की हंसी को कहते हुए।।

कुछ ही पल का जब साथ देखा,
जो आह निकली मार गयी ।

तेरी आंखों में जब जब देखा,
जो कशिश दिखी दिल पर गयी।।

 

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