तेरा क्या-क्या होगा ?-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

तेरा क्या-क्या होगा ?-भूल जाओ पुराने सपने -नागार्जुन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nagarjun

तेरा क्या-क्या होगा ?
निरीह भोले !
तेरे को कभी पता नहीं चलेगा
तेरी इस छवि का,
तेरी उस छवि का,
क्या-क्या इस्तेमाल हुआ !
निकट भविष्य में
या दूर भविष्य में
कहाँ-कहाँ, कब-कब
तेरी इन छवियों का
कैसे-कैसे इस्तेमाल होगा,
तेरे को कभी पता नहीं चलेगा

लगभग भूखा ! लगभग नंगा तू
अभी क्या खाना चाहता है ?
पेट भर जाने पर
तू क्या-क्या पहनना चाहेगा ?
क्या-क्या ओढ़ना चाहेगा ?
पेट भर जाने पर
यों ही उलंग
तू भाग जाना चाहेगा
अपने सम-वयसी
उलंग साथियों के बीच
तू उन्हें दस पैसे पाँच पैसेवाला
यह ताजा सिक्‍का
नहीं दिखाना चाहेगा ?

(3.3.89)

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