तू मेरा पिता तूहै मेरा माता-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

तू मेरा पिता तूहै मेरा माता-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

तू मेरा पिता तूहै मेरा माता ॥
तू मेरे जीअ प्रान सुखदाता ॥
तू मेरा ठाकुरु हउ दासु तेरा ॥
तुझ बिनु अवरु नही को मेरा ॥१॥
करि किरपा करहु प्रभ दाति ॥
तुम्हरी उसतति करउ दिन राति ॥१॥ रहाउ ॥
हम तेरे जंत तू बजावनहारा ॥
हम तेरे भिखारी दानु देहि दातारा ॥
तउ परसादि रंग रस माणे ॥
घट घट अंतरि तुमहि समाणे ॥२॥
तुम्हरी क्रिपा ते जपीऐ नाउ ॥
साधसंगि तुमरे गुण गाउ ॥
तुम्हरी दइआ ते होइ दरद बिनासु ॥
तुमरी मइआ ते कमल बिगासु ॥३॥
हउ बलिहारि जाउ गुरदेव ॥
सफल दरसनु जा की निरमल सेव ॥
दइआ करहु ठाकुर प्रभ मेरे ॥
गुण गावै नानकु नित तेरे ॥4॥18॥31॥1144॥

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