तुम-हम-कहें केदार खरी खरी-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

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सत्ताइस साल में तुम
न तुम रह गए तुम
न हम रह गए हम
तुम हो गए खूँखार
हम हो गए बीमार
अभाव-ग्रस्त लाचार

रचनाकाल: ०१-०८-१९७६

 

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