तुम सोए-पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya

तुम सोए-पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya

तुम सोये
नींद में
अधमुँदे हाथ
सहसा हुए
कँपने को
कँपने में
और जकड़े
मानो किसी
अपने को
पकड़े
कौन दीखा
सपने में
कहाँ खोये
तुम किस के साथ
अधमुँदे हाथ
नींद में
तुम सोये।

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