तुमने जो दिया है-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

तुमने जो दिया है-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

तुमने जो दिया है वह सब
हवा है प्रकाश है पानी है
छन्द है गन्ध है वाणी है
उसी के बल पर लहराता हूँ
ठहरता हूँ बहता हूँ झूमता हूँ
चूमता हूँ जग जग के काँटे
आया है जो कुछ मेरे बाँटे
देखता हूँ वह तो सब कुछ है
सुख दु:ख लहरें हैं उसकी
मैं जो कहता हूँ
समय किसी स्टेनो की तरह
उसे शीघ्र लिपि में लिखता हूँ
और फिर आकर
दिखा जाता है मुझे
दस्तखत कर देता हूँ
कभी जैसा का तैसा उसे
विस्मृति के दराज में धर देता हूँ।
तुमने मुझे जो कुछ दिया है वह सब
हवा है प्रकाश है पानी है।

 

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