तुझे उदास किया ख़ुद भी सोग़वार हुए-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

तुझे उदास किया ख़ुद भी सोग़वार हुए-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

तुझे उदास किया ख़ुद भी सोगवार हुए
हम आप अपनी महब्बत में शर्मसार हुए

बला की रौ थी नदीमाने-आबला-पा को
पलट के देखना चाहा कि ख़ुद ग़ुबार हुए

गिला उसी का किया जिससे तुझ पे हर्फ़ आया
वगरना यूँ तो सितम हम प’ बे-शुमार हुए

ये इंतकाम भी लेना था ज़िन्दगी को अभी
जो लोग दुश्मने-जाँ थे वो ग़मगुसार हुए

हज़ार बार किया तर्क़े-दोस्ती का ख़याल
मगर ‘फ़राज़’ पशेमाँ हरेक बार हुए

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