तुझसे प्यार करना भूल थी -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Tujhse Pyar Karna Bhool Thi Part 1

तुझसे प्यार करना भूल थी -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Tujhse Pyar Karna Bhool Thi Part 1

इश्क़ की इस नगरी में हम फस से गए हैं,
वापिस आना मुश्किल है हो बेबस से गए हैं
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इश्क़ करने का भुगता खाम्याज़ा जा रहा है,
आज फ़िर किसी आशिक़ का जनाज़ा जा रहा है

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इतना रुतबा है मेरे इश्क़ का तू देखना,
क्यामत के वक़्त तुझे मौत आएगी मुझे मुहब्बत आएगी

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मुहब्बत भरी नज़रों से देख दुश्वार मत कर,
चला जा मेरी नज़रों से दूर मुझे प्यार मत कर

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वतन के नाम पर है कुरबान ज़िंदगी,
मैं मर भी गया तो कोई गम नहीं होगा
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दरवाज़े पे दस्तक फिर कौन दे रहा है,
सब जानते हुए भी पंगा क्यों ले रहा है

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तुझे छोड़कर जाने में मन घबरा रहा है,
तेरे ज़ूल्फों से खेलने का मज़ा सा आ रहा है

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तेरी तस्वीर को छुपाए रखा उसका खिताब था,
हमने पन्ना ही अब फाड़ दिया उस किताब का

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मैंने तो आग जलाई थी सेकने के लिए,
मगर लोग आ गए तमाशा देखने के लिए

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उन्होंने कहा जान वफ़ादारी का सबूत पेश कर,
मैंने कहा तू पहले मेरी गद्दारी तो साबित कर

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तेरा दिमाग परेशान हो गया मेरे पीछे,
और मेरा दिल बेईमान हो गया तेरे पीछे

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उम्र सारी गुज़र जाती है इसे सीखने के लिए,
खेल का आख़िरी पड़ाव भी काफ़ी है जीतने के लिए

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ख़ुशी से जीना और ख़ुशी से मरना,
इसी को कहते हैं जिंदगी संवरना

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नज़रें झुका लेना उन्हें देखकर,
कहीं ये ना हो फ़िर से इश्क़ हो जाए

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कोई ना हो पास कोई दूर ना हो,
ऐसा मुकद्दर किसी को मंज़ूर ना हो

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दिल में अचानक उठते दर्द का इलाज चाहिए,
एक का तो कल चाहिए एक का आज चाहिए

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जो बात प्यार मुहब्बत में है वो किसी मज़हब में नहीं,
जो बात मेरे मेरे मुर्शिद में है वो तेरे रब में नहीं

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