तुकों के खेल-बाल कविता-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

तुकों के खेल-बाल कविता-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

मेल बेमेल
तुकों के खेल
जैसे भाषा के ऊंट की
नाक में नकेल !
इससे कुछ तो
बनता है
भाषा के ऊंट का सिर
जितना तानो
उतना तनता है!

 

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