तीरथयात्रा-विंदा करंदीकर -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Vinda Karandikar 

तीरथयात्रा-विंदा करंदीकर -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Vinda Karandikar

 

तीरथ यात्रा करते करते, अनजाने
औचक पहुँचा तेरे द्वार
पा गया देह में तेरी
सब तीर्थों का सार।

अधरों पर, सखि, वृन्दावन
प्रयाग तेरी पलकों में
माथे पर मानसरोवर
अरु गंगोत्री ग्रीवा में।

गया तेरे गालों में समायी
और काँधे रामेश्वर
मिली द्वारिका कटि पर तेरी
श्रीकाशी है इधर उधर।

चाह मोक्ष की किसे रही अब
चाहूँ कृपा न दूजी
तीरथयात्रा करते करते, अनजाने में
औचक पहुँचा तेरे द्वार।

(अनुवाद : रेखा देशपांडे)

 

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