तिह जोगी कउ जुगति न जानउ- शब्द-ੴ सतिगुर प्रसादि धनासरी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

तिह जोगी कउ जुगति न जानउ- शब्द-ੴ सतिगुर प्रसादि
धनासरी महला ९-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

तिह जोगी कउ जुगति न जानउ ॥
लोभ मोह माइआ ममता फुनि जिह घटि माहि पछानउ ॥1॥रहाउ॥
पर निंदा उसतति नह जा कै कंचन लोह समानो ॥
हरख सोग ते रहै अतीता जोगी ताहि बखानो ॥1॥
चंचल मनु दहदिसि कउ धावत अचल जाहि ठहरानो ॥
कहु नानक इह बिधि को जो नरु मुकति ताहि तुम मानो ॥2॥3॥685॥

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