तिसु बसंतु जिसु प्रभु क्रिपालु-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

तिसु बसंतु जिसु प्रभु क्रिपालु-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

तिसु बसंतु जिसु प्रभु क्रिपालु ॥
तिसु बसंतु जिसु गुरु दइआलु ॥
मंगलु तिस कै जिसु एकु कामु ॥
तिसु सद बसंतु जिसु रिदै नामु ॥१॥
ग्रिहि ता के बसंतु गनी ॥
जा कै कीरतनु हरि धुनी ॥१॥ रहाउ ॥
प्रीति पारब्रहम मउलि मना ॥
गिआनु कमाईऐ पूछि जनां ॥
सो तपसी जिसु साधसंगु ॥
सद धिआनी जिसु गुरहि रंगु ॥२॥
से निरभउ जिन्ह भउ पइआ ॥
सो सुखीआ जिसु भ्रमु गइआ ॥
सो इकांती जिसु रिदा थाइ ॥
सोई निहचलु साच ठाइ ॥३॥
एका खोजै एक प्रीति ॥
दरसन परसन हीत चीति ॥
हरि रंग रंगा सहजि माणु ॥
नानक दास तिसु जन कुरबाणु ॥4॥3॥1180॥

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