तिलग महला ९ काफी -ੴ सतिगुर प्रसादि-चेतना है तउ चेत लै निसि दिनि मै प्रानी- शब्द- -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

तिलग महला ९ काफी -ੴ सतिगुर प्रसादि-चेतना है तउ चेत लै निसि दिनि मै प्रानी- शब्द- -गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

 

चेतना है तउ चेत लै निसि दिनि मै प्रानी ॥
छिनु छिनु अउध बिहातु है फूटै घट जिउ पानी ॥1॥रहाउ॥
हरि गुन काहि न गावही मूरख अगिआना ॥
झूठै लालचि लागि कै नहि मरनु पछाना ॥1॥
अजहूकछु बिगरिओ नही जो प्रभ गुन गावै ॥
कहु नानक तिह भजन ते निरभै पदु पावै ॥2॥1॥726॥

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