तिर्याक़-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

तिर्याक़-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

जब तिरी उदास अँखड़ियों से
पल-भर को चमक उठे थे आँसू
क्या-क्या न गुज़र गई थी दिल पर!
अब मेरे किए मलूल थी तू

कहने को वो ज़िंदगी का लम्हा
पैमाने-वफ़ा से कम नहीं था
माज़ी की तवील तल्ख़ियों का!
जैसे मुझे कोई ग़म नहीं था
तू! मेरे लिए ! उदास इतनी
क्या था ये अगर करम नहीं था

तू आज भी मेरे सामने है
आँखों में उदासियाँ न आँसू
एक तंज़ है तेरी हर अदा में
चुभती है तिरे बदन की ख़ुश्बू
या अब मेरा ज़ह्रपी चुकी तू

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