तिरी उमीद, तिरा इंतज़ार जब से है-ज़िन्दां-नामा-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

तिरी उमीद, तिरा इंतज़ार जब से है-ज़िन्दां-नामा-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Faiz Ahmed Faiz

तिरी उमीद, तिरा इंतज़ार जब से है
न शब को दिन से शिकायत न दिन को शब से है

किसी का दर्द हो करते हैं तेरे नाम रक़म
गिला है जो भी किसी से तेरे सबब से है

हुआ है जब से दिल-ए-नासुबूर बेक़ाबू
कलाम तुझसे नज़र को बड़े अदब से है

अगर शरर है तो भड़के, जो फूल है तो खिले
तरह तरह की तलब तेरे रंगे-लब से है

कहाँ गए शबे-फ़ुरक़त के जागनेवाले
सितारा-ए-सहरी हमक़लाम कब से है

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