तितलियों के दल-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

तितलियों के दल-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

ग्रीष्म का आतप
बहकती तितलियों के दल

दोपहर की गुनगुनाहट
रहट की आहट
पी रहे
एकांत में यह ग्राम्य कोलाहल
बहकती तितलियों के दल

एक टुकड़ा धूप पर
चमका सुबह का नाम
डाल पंखुरी फूल पर
लिखता हुआ पैगाम
हवा का अनुमान
बादलों के
रंग का कोई गीत निश्छल
गा रहे हैं फिर –
बहकती तितलियों के दल

दोपहर के शांत खेतों में
बिखरते छंद
शहर के तूफान में फिर
ढूँढ़ते मकरंद
पल कोई स्वच्छंद
खुल सकें
जिसमें हृदय के बोल कुछ बेकल
कह रहे हैं फिर-
बहकती तितलियों के दल

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