तारो को किसी ने नही देखा-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

तारो को किसी ने नही देखा-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

सबने देखा चाँद और वो चांदनी
उन उदास तारो को किसी ने नही देखा

सबने सुनी मोहब्बत की कहानी
मरते किरदारों को किसी ने नही देखा

कैसे सुनाई देती सिसकियां लब्जो में
ग़ज़ल में दीवारों को किसी ने नही देखा

कैसे देखते दम तोड़ते गीत इश्क़ के
इश्क़ के पहरेदारो को किसी ने नही देखा

हँसते रहे लड़खड़ाते मेरे कदमो पर
संभालते मेरे यारो को किसी ने नही देखा

दोषी थी माना मेरी डूबती कश्ती भी
पर बेवफा पतवारों को किसी ने नही देखा

कैसे केवल मै जिम्मेदार मेरे जख्मो का
शायद तेरे किये वारो को किसी ने नही देखा ।।

Leave a Reply