तारों से भरा आसमान ऊपर-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

तारों से भरा आसमान ऊपर-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

तारों से भरा आसमान ऊपर
हृदय से हरा आदमी भू पर
होता रहता हूं रोमांचित
वह देख कर यह छूकर ।

 

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