तारे-कर्मजीत सिंह गठवाला -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karamjit Singh Gathwala ,

तारे-कर्मजीत सिंह गठवाला -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karamjit Singh Gathwala ,

निक्के निक्के प्यारे प्यारे ।
चमकन विच असमानी तारे ।
दिन वेले किधरे लुक जांदे ।
रातीं आ फिर टिमटिमांदे ।
जद ज़रा कु बद्दल होवन ।
उहनां पिच्छे मूंह लुकोवन ।
बद्दल जद पर्हां हो जावन ।
फिर लगदे झातियां पावन ।
जी करे इन्हां कोल जावां ।
इहनां नाल दोसती पावां ।
मंमी नूं मैं जा सुणाया ।
मंमी मैनूं इह समझाया ।
‘दुद्ध पी के वड्डा हो जावीं ।
उन्हां नाल दोसती पावीं’ ।

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