तारीख़ में लिखा है कि -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

तारीख़ में लिखा है कि -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

तारीख़ में लिखा है कि दर-जोश-ए-कारज़ार ।
सतिगुर बढ़ाते ही गए आगे को राहवार ।
हमराह रह गए थे ग़रज़ चन्द जां-निसार ।
फ़रज़न्दों में थे साथ अजीत और थे जुझार ।
ज़ोरावर और फ़तह जो दादी के साथ थे ।
दायें की जगह चल दिये वुह बायें हाथ थे ।

Leave a Reply