तारीफ़ गुरूगंजबख़्श की- कविता (धार्मिक)-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi 

तारीफ़ गुरूगंजबख़्श की- कविता (धार्मिक)-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

हो रह विला मुदाम गुरू गंज बख़्श का।
ख़ूबी में हैं क़याम गुरू गंज बख़्श का।
कृपा में एहतराम गुरू गंज बख़्श का।
ले दिल हमेशा नाम गुरू गंज बख़्श का।
रख ध्यान सुबहो शाम गुरू गंज बख़्श का॥1॥

हरदम उन्हीं की याद का रख दिल में तू ख़याल।
और रख सुरत तू अपनी उन्हीं के चरन दे नाल।
खोते हैं सबके दिल के वही रंज और मलाल।
सेवक को अपने करते हैं एक आन में निहाल।
बख़्शिश में है यह काम गुरू गंज बख़्श का॥2॥

आते हैं वह मदद के तईं जल्द हर कहीं।
उनका हुआ जो दिल से उसे कुछ ख़तर नहीं।
यह बात ठीक है इसे कर जी में तू यक़ीं।
गिरता हुआ जो नाम ले उनका तो उस तईं।
लेता है नाम थाम गुरू गंज बख़्श का॥3॥

ख़ूबी कुछ उनके लुत्फ़ की जाती नहीं कहीं।
कृपा वह अपनी रखते हैं हर आन हर घड़ी।
गहते हैं दुःख में बांह बहुत होते हैं खुशी।
कहते हैं जिसको लुत्फ़ की मसनद सो हैं वही।
है दिल सदा मुक़ाम गुरू गंज बख़्श का॥4॥

रख उनकी लहजः लहजः तू कृपा उपर नज़र।
वह अपने गंज लुत्फ़ से देते हैं सीमो-ज़र।
जो चाहिए मुराद उन्हीं से तू अर्ज़ कर।
जो दिल से पूजते हैं तो उन सबके हाल पर।
अल्ताफ़ हैं मुदाम गुरू गंज बख़्श का॥5॥

उनकी सरन में आया तो फिर दुःख न हो कभू।
रख लेंगे अपनी मेहर से वह तेरी आबरू।
रख अपने जी से उनकी ही कृपा की आरजू।
अरदास करके सर को झुका उनके दर पे तू।
लुत्फो करम है आम गुरू गंज बख़्श का॥6॥

कर अर्ज़ उनसे अपना तू अहवाल ऐ नज़ीर।
अपने करम से लेंगे तुझे पाल ऐ नज़ीर।
रख उनकी याद जी मैं तू हर हाल ऐ नज़ीर।
रहता है जग में खुश दिलो खुशहाल ऐ नज़ीर।
है दिल से जो गुलाम गुरू गंज बख़्श का॥7॥

Leave a Reply