तम्सील-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

तम्सील-दर्द आशोब -अहमद फ़राज़-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmed Faraz,

कितनी सदियों के इंतज़ार के बाद
क़ुर्बते-यक-नफ़स नसीब हुई
फिर भी तू चुप उदास कम-आमेज़

ऐ सुलगते हुए चराग़ भड़क
दर्द की रौशनी को चाँद बना
कि अभी आँधियों का शोर है तेज़

एक पल मर्गे-जावेदाँ का सिला
अजनबीयत के ज़ह्र में मत घोल
मुझको मत देख लेकिन आँख तो खोल

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