तब तुम आए-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

तब तुम आए-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

तब तुम आए !

निरख-निरख कर राह रात-दिन,
काल-पवन के पल-छिन गिन-गिन,
युग-युग से दर्शन के प्यासे जब नयना पथराए!
तब तुम आए!!

कैसे पूजा करे तुम्हारी
मेरा व्याकुल विरह-पुजारी,
मन्दिर के पट खुले फूल जब थाली के मुरझाए!
तब तुम आए!!

बहुत हो चुका तव पद-वन्दन,
अब तुम करो हमारा पूजन,
जिससे मेरी मूर्ति तुम्हारी ही सूरत बन जाये!
तब तुम आए!!

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