तपस्वी-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

तपस्वी-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

नष्ट कर इच्छा हृदय की
रे तपस्वी! क्या मिलेगा?

क्या रखा इन प्रक्रमों में
मोक्ष संबंधी क्रमों में
चित्त तेरा मुक्त होकर,
शून्यता में क्या करेगा?

सत्य से इतने विलग क्यों
वेग से सम्बद्ध अग क्यों
सृष्टि से संयुक्त होना,
क्या तुम्हारा छीन लेगा?

लुप्त इच्छाएँ जहाँ पर
शून्य है जीवन वहाँ पर
कामना के ही धरा पर,
पुष्प जीवन का खिलेगा।

एकदा,करना प्रणय से
प्रश्न यह अपने हृदय से
मोक्ष भी तो कामना है,
क्या इसे वह त्याग देगा?

 

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