तन्वी-कविता-रामेश्वर नाथ मिश्र ‘अनुरोध’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshwar Nath Mishra Anurodh 

तन्वी-कविता-रामेश्वर नाथ मिश्र ‘अनुरोध’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshwar Nath Mishra Anurodh

 

छमछम छमक, छमक छम पग धरे;
हरे उर-शूल को समूल दृग – तीर से ।
भूषण-वसन मन-प्राण, भूख-प्यास हरें,
चीर-चीर देती धीर चीर के समीर से ।
वचन अशन सम, जीवन पीयूषपूर्ण;
अधर मधुर रसपूर जनु खीर से ।
हेर-हेर हँसती तो ढेर-ढेर फूल झरे,
तन्वी सुगंध ढरे सुतनु उसीर से ।
भले तुम में प्रखर पावक मगर शीतल छुवन तेरी ।
मगन मन आरती करता भुवनमोहन सुमन तेरी ।
तूँ भय है तो अभय भी है, तूँ पावक है तो पानीभी
विरोधी में समन्वय साधने की है लगन तेरी ।
चंद्रवदन में चपल दृग, दृग में ललित विलास ।
पुहुप – बीच मकरंद ज्यों उसमें तीव्र सुवास।।

 

Leave a Reply