तड़ित रश्मियां-शैलेन्द्र चौहान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shailendra Chauhan

तड़ित रश्मियां-शैलेन्द्र चौहान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shailendra Chauhan

 

पेड़ पर टंगी उदासी
पूर्णिमा के चाँद की तरह
झाँकती है स्पष्ट
कोहरे में छुपी
धूल में लिपटी
बारिश में भीगी
मेघ गर्जन सी
तड़ित रश्मियाँ
एकाएक छिटक जाती हैं
देश-प्रदेश के
सीले भू-भाग पर
कौंधती हैं स्मृतियाँ
बीते युगों की |

 

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