ढूंढ़ना न मुझे, कि मैं सवाल हूँ !-सरवरिन्दर गोयल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Sarvarinder Goyal 

ढूंढ़ना न मुझे, कि मैं सवाल हूँ !-सरवरिन्दर गोयल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Sarvarinder Goyal

 

कामिल हो अगर तुम, तो मैं बे-मिसाल हूँ ,
ढूंढ़ना न मुझे, कि मैं सवाल हूँ !

हाज़िर हूँ हर जगह, तमाम शह मौजूद हूँ,
ला-खौफ, ला-जिस्मी, ला-फानी, ला-ख़याल हूँ !
ढूंढ़ना न मुझे कि मैं सवाल हूँ——–

खाना-बदोश हूँ, कि ठिकाना नहीं मेरा,
आब-ए-दरिया सा रवां-ए-चाल हूँ !
ढूंढ़ना न मुझे कि मैं सवाल हूँ——–

पर्दा-नशीन नहीं, न बे-पर्देदार हूँ,
न सुन्नी न शिया न हराम न हलाल हूँ !
ढूंढ़ना न मुझे कि मैं सवाल हूँ——–

न दौलत-ओ-शौहरत, न खुशामद-ओ-रसूख से,
न काबिल-ऐ-खरीद, न मुफ्त का माल हूँ !
ढूंढ़ना न मुझे कि मैं सवाल हूँ——–

न रंजिशमन्द, न दानिश, न यार-पसंद हूँ,
न मुख़ालिफ़, न मुकाबिल, न मुहाल हूँ !
ढूंढ़ना न मुझे कि मैं सवाल हूँ——–

“सरकश” पाबंद नहीं हु मैं जामा-ऐ-पंचम का,
न हरा सफेद केसरी न मैं लाल हूँ!
ढूंढ़ना न मुझे कि मैं सवाल हूँ——–

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