डूब रहे हो और बहते हो-वादा-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

डूब रहे हो और बहते हो-वादा-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

डूब रहे हो और बहते हो
दरिया किनारे क्यूँ रहते हो

याद आते हैं वादे जिनके
तेज हवा में सूखे तिनके
उनकी बातें क्यूँ कहते हो

बात करें तो रुख़सारों में
दो चकराते भंवर पड़ते हैं
मझधारों में क्यूँ रहते हो

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