डूबते देखा समय को-अपने सामने -दो-कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

डूबते देखा समय को-अपने सामने -दो-कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

डूबते देखा समय को
जो अभी अभी सूर्य था

अपने में अस्त
मैं, शाम में इस तरह व्यस्त
कि जैसे वह हुई नहीं-मैंने की,
उसके व्यर्थ रंगों को
एक साहसिक योजना दी।

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