डिस्को की वो रात-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

डिस्को की वो रात-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

जहां सागर की थमती लहरो को देखा
मैंने वहां हुश्न के काले चेहरो को देखा ।

चमकती गुलाम रातो मे
दमकती अंजान राहो मे
बेबस बिकती आबरू के ढेरो को देखा ।

बहते जामो के गागर मे
ढलती शामो के सागर मे
हवश की चाह के भूखे शेरो को देखा ।

नग्न नाजुक काया को
सहमी पड़ी परछाया को
चंद पैसो से नोचते नये गैरो को देखा ।

नैनो ने विचलित होकर
हृदय ने चित को खोकर
ख्वाबो को यूं निगलते अंधेरो को देखा ।

कालिख बेशर्म शामो के
दर्द निशां बेदर्द कामो के
मिटाते हर रोज यूं नये सवेरो को देखा ।।

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