झरती हुई नीम-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

झरती हुई नीम-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

नीम नीम धरती है नीम नीम छत
फूल फूल बिखरी है बाँटती रजत

तितली सी उड़ती है दूर तक हवाओं में
चैत की छबीली है छिटकती छटाओं में
उत्सव के रेले हैं
पात पात मेले हैं
हुरियारी बगिया ने
खूब रंग खेले हैं
लेकिन यह श्वेत वर्ण फूल फूल बिखरी है
नीम नीम झरती है नीम नीम ठहरी है
टाँकती दिशाओं में
रेशमी नखत

जाने क्या कहती है सड़कों के कानों में
सर सर स्वर भरती है फागुन के गानों में
खुशियों में खोना है
नीम नीम होना है
दूर तलक इसी तरह
जाना है होना है
आकर के करतल पर पल भर को ठहरी है
अँगुली के पोरों पर धुन कोई लहरी है
थिरकेगी तारों पर मंद्र
कोई गत

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