झगरा एकु निबेरहु राम-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

झगरा एकु निबेरहु राम-शब्द-कबीर जी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kabir Ji

 

झगरा एकु निबेरहु राम ॥
जउ तुम अपने जन सौ कामु ॥१॥ रहाउ ॥
इहु मनु बडा कि जा सउ मनु मानिआ ॥
रामु बडा कै रामहि जानिआ ॥१॥
ब्रहमा बडा कि जासु उपाइआ ॥
बेदु बडा कि जहां ते आइआ ॥२॥
कहि कबीर हउ भइआ उदासु ॥
तीरथु बडा कि हरि का दासु ॥३॥४२॥331॥

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