-ज्ञान-वैराग्य कुण्डलियाँ-गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

बहता पानी निर्मला, पड़ा गंध सो होय-ज्ञान-वैराग्य कुण्डलियाँ-गिरिधर कविराय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Giridhar Kavirai

बहता पानी निर्मला, पड़ा गंध सो होय ।
त्यों साधू रमता भला, दाग न लागै कोय॥
दाग न लागै कोय, जगत में रहै अलेदा ।
राग द्वेष जुग प्रेत न चितको करै बिछैदा ॥
कह गिरिधर कविराय, शीत उष्णादिक सहता ।
होइ ना कहुं आसक्त, यथा गंगाजल बहता॥

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