ज्ञानी पिंदरपाल सिंह जी को अपने खेतों में घूमते देखकर-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

ज्ञानी पिंदरपाल सिंह जी को अपने खेतों में घूमते देखकर-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

धरती
पहचाने मेरे आँगन
ये तो मेरा बेटा आया

गुरू का शब्द
सदा
साथ है
जिसने सारे जग में बताया

सच्चे सौदे वाली गेहूँ
पिसी, गूँथी
और पकाई
पर तेरी
लौ न टूटी
जीता रहे तूँ मेरे बेटे

 

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