जो हाथ अपने सब्ज़े का घोड़ा लगा-इंशा अल्ला खाँ ‘इंशा’ -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Insha Allah Khan Insha

जो हाथ अपने सब्ज़े का घोड़ा लगा-इंशा अल्ला खाँ ‘इंशा’ -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Insha Allah Khan Insha

जो हाथ अपने सब्ज़े का घोड़ा लगा
तो सुलफ़े का और उस को कोड़ा लगा

मिरे ही जो बाज़ू में इक नील सा
सो तेरे है पाँव का तोड़ा लगा

अजी चश्म-ए-बद-दूर नाम-ए-ख़ुदा
तुम्हें क्या भला सुर्ख़ जोड़ा लगा

भला आप शरमाए किस वास्ते
कबूतर का बाहम जो जोड़ा लगा

ये दुखती निगाहों से घूरा मुझे
कि दुखने मिरे दिल का फोड़ा लगा

लगी कहने ‘इंशा’ को शब वो परी
मुझे भूत हो ये निगोड़ा लगा

 

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